ऑपरेटिंग सिस्टम क्या है?[2023] Operating System क्या काम करता है ?

हेल्लो दोस्तों कैसे है आप सब आप सभी का बहुत बहुत स्वागत है हमारे ब्लॉग जिसका नाम है Tech Sidd यहाँ पर आपको अपनी हिंदी सुद्ध और सरल भाषा में कंप्यूटर और इन्टरनेट से जुडी हुई कई जानकारियां पढने को मिलती हैं|

दोस्तों ऑपरेटिंग सिस्टम (Operating System) के बारे में तो सब जानते हैं क्योंकि इसका इस्तेमाल हम रोज कंप्यूटर या मोबाइल के जरिये कर रहे हैं| जिस तरह मोबाइल और इन्टरनेट हमारी जिंदगी का एक जरूरी हिस्सा बन गया है इसके बिना हम आज के समय में एक काम भी नहीं कर सकते ठीक उसी तरह मोबाइल और कंप्यूटर को सही तरह से काम करने के लिए ऑपरेटिंग सिस्टम बनाया गया है जो उनके लिए बेहद जरूरी है|

जैसे कि हम इंसानों के शरीर में बहुत से अंग होते हैं जो हमें सारे काम करने के लिए लायक बनाते हैं भले ही कोई अंग अगर काम करना बंद कर दे फिर भी हम जिन्दा रहते हैं लेकिन अगर हमारे शरीर का मुख्य चीज जैसे आत्मा निकाल दी जाए तो शरीर में सारे अंग होने के बावजूद भी किसी काम के नहीं रहेंगे|

ऑपरेटिंग सिस्टम क्या है

 

कुछ ऐसा ही हाल होगा हमारे कंप्यूटर और मोबाइल के साथ भी इनके अन्दर भी बहुत सी मशीन के पार्ट्स लगे होते हैं| लेकिन मोबाइल और कंप्यूटर तैयार करने के बाद अगर इनके अन्दर ऑपरेटिंग सिस्टम इंस्टाल नहीं किया जायेगा तो वो मोबाइल या कंप्यूटर स्टार्ट नहीं होगा इसीलिए ऑपरेटिंग सिस्टम बहुत ही Important हिस्सा होता है किसी भी मोबाइल फ़ोन , टेबलेट ,कंप्यूटर , और  लैपटॉप का |

तो दोस्तों आज के इस लेख में हम आपको मोबाइल और कंप्यूटर में उपयोग होने वाले  ऑपरेटिंग सिस्टम के बारे में बताएँगे कि ऑपरेटिंग सिस्टम क्या होता है और यह कंप्यूटर या मोबाइल में किस तरह से काम करता है और ये कितने प्रकार का होता है इन सभी चीजों के बारे में इस पोस्ट में आपको जानने को मिलेगा तो लेख को पूरा जरूर पढ़ें |

 लेख का अनुक्रम –

ऑपरेटिंग सिस्टम क्या होता है ?

ऑपरेटिंग सिस्टम के नाम |

ऑपरेटिंग सिस्टम क्या काम करता है ?

ऑपरेटिंग सिस्टम कितने प्रकार के होते हैं ?

ऑपरेटिंग सिस्टम क्या होता है?

ऑपरेटिंग सिस्टम जिसे Short में OS भी कहा जाता है ये एक सिस्टम सॉफ्टवेयर है जो कंप्यूटर के हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर के बीच सभी कामों का सञ्चालन करता है| ऑपरेटिंग सिस्टम एक ऐसा सॉफ्टवेयर है जो यूजर और कंप्यूटर के बीच एक इंटरफ़ेस प्रदान करता है जिसके जरिये यूजर कंप्यूटर के साथ कम्यूनिकेट कर पाता है और इसके लिए यूजर को कंप्यूटर की भाषा समझने की जरूरत भी नहीं होती है|

सभी कंप्यूटर को सही तरह से काम करने के लिए और दूसरी Applications और Programs को रन करने के लिए OS की आवश्यकता होती है | Chrome, Photoshop, Games, Ms Word, इत्यादि जैसे Applications को एक माध्यम या प्लेटफ़ॉर्म की जरूरत होती है जिसमें वो रन कर सके और अपने टास्क को पूरा कर सके और ये प्लेटफ़ॉर्म उन्हें OS प्रदान करते हैं|

बिना ऑपरेटिंग सिस्टम के कंप्यूटर बेकार है | कंप्यूटर ऑपरेटिंग सिस्टम बहुत से छोटे छोटे Programs का समूह होता है इसे एक साथ जोड़कर सिस्टम के स्टोरेज डिवाइस में रखा जाता है यही प्रोग्राम का समूह है जोकि कंप्यूटर के Resources जैसे Hardware और उनके कार्य को मैनेज करता है| कंप्यूटर के हार्डवेयर अपने बल काम नहीं कर सकते और न ही एक दुसरे के साथ इंटरेक्ट कर सकते हैं इसलिए ऑपरेटिंग सिस्टम द्वारा किये जाने वाले इलेक्ट्रॉनिक्स सिग्नल के द्वारा ही ये हार्डवेयर अपना काम पूरा कर पाते हैं|

Os कंप्यूटर में लोड होने वाला पहला प्रोग्राम होता है और ये सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर के बीच ब्रिज की तरह काम करता है ताकि ये दोनों एक दुसरे के साथ इंटरेक्ट कर सके|

 

ऑपरेटिंग सिस्टम के नाम |

ऑपरेटिंग सिस्टम के कई अलग अलग नाम हैं लेकिन उनका काम एक ही जैसा होता है और वो है यूजर को कंप्यूटर के साथ कम्यूनिकेट करवाना और हार्डवेयर को मैनेज करना | अब तक के प्रमुख OS के नाम की सूची नीचे दी गयी है |

1-      Windows OS

2-      Mac OS

3-      Linux OS

4-      Android OS

5-      IOS OS

6-      Ms DOS OS

7-      Symbian OS

तो अब तक आपने यह जान लिया कि ऑपरेटिंग सिस्टम क्या होता है और अब तक के ऑपरेटिंग सिस्टम के नाम क्या हैं और अब हम जानेंगे कि ऑपरेटिंग सिस्टम क्या काम करता है ?

ऑपरेटिंग सिस्टम क्या काम करता है?

ऑपरेटिंग सिस्टम कंप्यूटर का सबसे जरूरी प्रोग्राम होता है जोकि सभी साधारण और महत्वपूर्ण काम करता है जैसे कीबोर्ड द्वारा इनपुट की जा रही keys को समझना, आउटपुट को स्क्रीन पर दिखाना, हार्ड डिस्क पर फाइल्स और फ़ोल्डर्स को मैनेज करना और कंप्यूटर के सभी पार्ट्स के साथ कम्यूनिकेट करना इसके अलावा ये और भी कई तरह के काम करने में सक्षम है जैसे कि –

Memory Management – प्राइमरी मेमोरी या मेन मेमोरी के मैनेजमेंट को ही मैनेजमेंट कहा जाता है| ऑपरेटिंग सिस्टम प्राइमरी मेमोरी के हर एक कार्य को ट्रैक करता है यानि इसका कौन सा भाग किसके उपयोग में है और कौन सा भाग उपयोग में नहीं है, मेमोरी कहा इस्तेमाल हो रही है, कितनी मेमोरी इस्तेमाल हो रही है इसका पता लगाता है और मांगने पर मेमोरी उपलब्ध भी करवाता है| Multi Processing के समय OS तय करता है कि किस प्रक्रिया को कब और कितनी मेमोरी मिलेगी जब कोई प्रोग्राम का कार्य ख़त्म हो जाता है तो ये एलोकेट की गयी मेमोरी को कंजर्व करता है|

Processor Management – Multi Programming वातावरण में OS तय करता है कि किस प्रक्रिया को प्रोसेसर उपयोग करने के लिए कब और कितने समय के लिए देना है इसे Process Scheduling कहा जाता है| OS प्रोसेसर और प्रोसेसिंग की स्तिथी पर नजर रखता है इस कार्य के लिए OS के जिस प्रोग्राम का उपयोग होता है उसे ट्रैफिक कंट्रोलर के रूप में जाना जाता है| OS प्रोसेस को कार्य को पूरा करने के लिए CPU अनुमति देता है और कार्य समाप्त होने के बाद प्रोसेसर को फ्री कर देता है|

Device Management – ऑपरेटिंग सिस्टम अपने सम्बंधित ड्राइवर्स के माध्यम से डिवाइस कम्युनिकेशन का मैनेजमेंट करता है इसके लिए OS सभी devices पर नजर रखता है इस कार्य के लिए OS के जिस प्रोग्राम का उपयोग होता है उसे इनपुट , आउटपुट और कंट्रोलर के रूप में जाना जाता है| OS तय करता है कि कौन से प्रोसेस को डिवाइस कब और कितने समय के लिए देनी है जब डिवाइस का काम पूरा हो जाता है तब फिर OS उसे इनएक्टिव कर देता है|

File Management – फाइल सिस्टम को सामान्य रूप से आसान नेविगेशन और उपयोग के लिए फ़ोल्डर्स में व्यवस्थित किया जाता है OS इन फाइल्स की सूचना, स्थान, यूजर , स्टेटस आदि पर नजर रखता है ये हर सूचना को ट्रैक करता है इसके साथ ही फाइल का लोकेशन क्या है फाइल कब बनाई गयी फाइल कितने साइज़ की है, किस यूजर ने बनाई थी ये सारी जानकारी भी OS रिकॉर्ड करता है|

Security – OS हमारे सिस्टम को अनअथोराइज़ एक्सेस करने से रोकता है मतलब कि आपके अलावा कोई और यूजर बिना आपकी इजाजत के आपके कंप्यूटर का इस्तेमाल नहीं कर सकता और इसके लिए OS Password देने की पूरी आजादी देता है| जब आप अपना कंप्यूटर On करेंगे तो वो आपको सबसे पहले पासवर्ड पूछेगा उसके बाद ही आगे की प्रक्रिया के लिए इजाजत देगा इससे आपका कंप्यूटर सुरक्षित रहता है|

तो अब तक आपने यह भी जान लिया कि ऑपरेटिंग सिस्टम क्या काम करता है अब यह जान लेते हैं कि ऑपरेटिंग सिस्टम कितने प्रकार के होते हैं?

ऑपरेटिंग कितने प्रकार के होते हैं?

 

ऑपरेटिंग सिस्टम के प्रकार |

समय समय पर टेक्नोलॉजी में बदलाव किये जा रहे हैं साथ ही में कंप्यूटर ने भी समय के साथ काफी विकास किया है जब से कंप्यूटर की स्थापना हुई है तभी से ऑपरेटिंग सिस्टम काफी उपयोग किया जा रहा है| कंप्यूटर में बदलाव करने के साथ साथ ऑपरेटिंग सिस्टम को भी उसके साथ Compatible बनाने के लिए नए नए वर्शन को विकसित किया गया है| ऑपरेटिंग सिस्टम के भी कई सारे प्रकार हैं जैसे कि Multi user Operating System, Single user Operating system, Multitasking Operating System, Multiprocessing Operating System, Network Operating System, Distributed Operating System |

चलिए अब एक एक करके इनके बारे में थोड़ा विस्तार से जानते हैं|

Multi user Operating System –  ये ऑपरेटिंग सिस्टम एक से अधिक यूजर को एक साथ कार्य करने की सुविधा को प्रदान करता है ये OS कंप्यूटर नेटवर्क में प्रयोग किया जाता है जोकि एक ही समय में एक ही डेटा और एप्लीकेशन को एक से अधिक यूजर को एक्सेस करने की अनुमति देता है|

Single user Operating System – ये ऑपरेटिंग सिस्टम एक ही समय में सिर्फ एक ही यूजर को कार्य करने की अनुमति देता है पर्सनल कंप्यूटर के लिए इस्तेमाल होने वाला ऑपरेटिंग सिस्टम सिंगल यूजर OS है जिसे एक समय में एक कार्य को मैनेज करने के लिए डिजाईन किया गया है|

Multitasking Operating System – ये ऑपरेटिंग सिस्टम यूजर को एक साथ कई अलग अलग प्रोग्राम्स चलाने की सुविधा देता है इस ऑपरेटिंग सिस्टम में आप एक ही समय में ईमेल भी लिख सकते हैं और साथ ही गाने भी सुन सकते हैं, फेसबुक भी चला सकते हैं|

Multiprocessing Operating System – , Multiprocessing शब्द का इस्तेमाल एक प्रोसेसिंग तरीके को स्पष्ट करने के लिए किया जाता है जहाँ पर दो या दो से अधिक प्रोसेसर एक दुसरे से जुड़े रहते हैं| इस OS में सिस्टम में विभिन्न और indpendent प्रोग्राम के निर्देश एक ही समय में एक से अधिक प्रोसेसर द्वारा execute किये जाते हैं इसका मतलब है कि प्रोसेसर द्वारा विभिन्न निर्देश का execution एक के बाद एक किया जाता है जोकि एक ही प्रोग्राम से प्राप्त किये होते हैं |

Network Operating System – ये OS उन Computers को अपनी सर्विस प्रदान करती है जोकि एक नेटवर्क से कनेक्टेड होते हैं ये एक ऐसा प्रकार का OS है जोकि मल्टिपल computers एक साथ कम्यूनिकेट करने के लिए फाइल शेयर करने के लिए और दुसरे हार्डवेयर डिवाइस को एक्सेस करने की अनुमति देता है Network Operating System सर्वर पर रन होने वाला ऑपरेटिंग सिस्टम है|

Distributed Operating System – Distributed Operating System वो सिस्टम होते हैं जो डेटा को स्टोर करते हैं और बहुत सारे locations पर Distribute कर देते हैं| इस ऑपरेटिंग सिस्टम में बहुत सारे Central Processor का उपयोग किया जाता है और इन Processors के बीच प्रोसेसिंग के कार्य को बाँट दिया जाता है ये सेंट्रल प्रोसेसर कोई कंप्यूटर नोड या फिर कोई अन्य डिवाइस हो सकता है और ये सभी प्रोसेसर आपस में कम्युनिकेशन लाइन्स के द्वारा एक दुसरे से कनेक्ट रहते हैं | इसका एक फायदा ये है कि अगर एक कंप्यूटर या नोड बंद भी कर दिया जाए तो अन्य दुसरे कंप्यूटर से काम किया जा सकता है|

लेख के अंत में –

ऑपरेटिंग सिस्टम के बिना कंप्यूटर का कोई अस्तित्व नहीं है बिना OS के ये एक खाली डिब्बे के समान है| OS यूजर और कंप्यूटर हार्डवेयर के बीच इंटरफ़ेस की तरह काम करता है और अगर आपके कंप्यूटर में OS इनस्टॉल न हो तो आपके कीबोर्ड , माउस , CPU, आदि के बीच कभी भी सम्बन्ध स्थापित नहीं हो पायेगा| तो उम्मीद है इस लेख से ऑपरेटिंग सिस्टम क्या है इसका काम क्या है और यह कितने प्रकार के होते हैं इससे जुडी सारी जानकारी आपको मिल गयी होगी |

Tech Sidd ब्लॉग की हमेशा से यही कोशिश रहती है कि हमारे इस ब्लॉग के जरिये आपको कोई भी जानकारी आपकी अपनी सुद्ध हिंदी भाषा में मिल सके, यहाँ पर लिखी गयी हर एक जानकारी बहुत सारी रिसर्च और अध्यन करने के बाद लिखी जाती है, और इस ब्लॉग के ऑथर जिस विषय पर भी लिखते हैं वो उस विषय के पहले से ही एक्सपर्ट होते हैं इसीलिए निसंकोच आप इस ब्लॉग पर लिखे गए हर एक आर्टिकल को पढ़ सकते हैं और अपने ज्ञान को बढ़ा सकते हैं|

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